भारत की राष्ट्रभाषा क्या है?

आज आप इस आर्टिकल में जानेंगे कि Bharat Ki Rashtrabhasha Kya Hai? हर देश में अलग-अलग भाषा बोली जाती है। जैसे यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका में अंग्रेजी Language बोली जाती है। वैसे भारत के ज्यादातर लोग हिंदी को राष्ट्रीय भाषा मानते है। क्योंकि हिंदी हिन्दुस्तान के अधिकतर लोगो द्वारा बोली जाती है लेकिन यह सत्य नहीं है। किसी भी देश की संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा उसकी राष्ट्रभाषा होती है, जिसका प्रयोग लिखनें, पढ़नें और वार्तालाप करने में किया जाता है। देश के महत्वपूर्ण कार्य उस देश की राष्ट्रभाषा में ही किये जाते है।उदहारण के रूप में हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में बंगाली भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता दी गयी है और वह सबसे अधिक बंगाली भाषा का प्रयोग किया जाता है। आइए जानते हैं कि कि Bharat Ki Rashtrabhasha Kya Hai?

भारत की राष्ट्रभाषा क्या है

भारत एक ऐसा देश है जो अपनी विभिन्नताओं के लिए जाना जाता है, यहां हर राज्य की अपनी राजनैतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान है लेकिन उसके बाद भी देश में की कोई एक राष्ट्रभाषा नहीं है। हिंदी की बात करे तो इसे हिंदुस्तान संविधान के अनुच्छेद 343 के अंतर्गत राजभाषा का दर्जा दिया गया है। इसका अर्थ यह हुआ कि इसे राजकीय कार्यों में प्रयोग किया जा सकता है। हालाकि भारत सरकार ने देश की 22 भाषाओं को अधिकारिक language के रूप में चिन्हित किया है।

केंद्र सरकार या राज्य सरकार अपने कार्यों के लिए अपनी सहूलियत के हिसाब से इन 22 भाषाओं में से किसी को भी चुन सकती है। उदाहरण के तौर पर केंद्र सरकार ने हिंदी और इंग्लिश को अधिकारिक लैंग्वेज के तौर पर चुना है देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी ही है और यही वजह है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिंदी को जनमानस की भाषा कहा था। महात्मा गांधी ने साल 1918 में हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की बात कही थी। महात्मा गांधी के अलावा जवाहरलाल नेहरू भी थे जिन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की वकालत की थी।

भारत की राष्ट्रभाषा का उल्लेख संविधान में

जब भारतीय संविधान का निर्माण हो रहा था तब राष्ट्र भाषा का भी जिक्र किया गया था। तब उस दौर में डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी ने संस्कृत भाषा को भारत की राष्ट्र भाषा बनाने का सुझाव दिया था लेकिन इसके विरोध के चलते इसे मान्यता नहीं दी गयी। इसी तरह संविधान सभा के कई लोग हिंदी को भी राष्ट्रीय भाषा बनाने का सुझाव दिया लेकिन गैर हिंदी भाषी छेत्र में इसका विरोध होने लगा।

संविधान के आंठवी अनुसूची में शामिल 22 भाषाएँ

भारतीय संविधान की आठवी अनुसूची में भारत की अधिकारिक भाषाओं का जिक्र किया गया है। जिनमें समय समय पर परिवर्तन देखने को मिला है। संविधान निर्माण के समय 14 भाषाओं को शामिल किया गया था लेकिन इसके बाद साल 1967 में सिन्धी भाषा को अनुसूची में शामिल किया गया। साल 1992 में कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली भाषा को शामिल किया गया वर्ष 2004 में बोड़ो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषा को शामिल किया गया था। इस तरह अब तक अनुसूची में 22 भारतीय भाषाओं का शामिल किया गया है।

हिन्दी भाषामलयालम भाषा
असमिया भाषाकोंकणी भाषा
तमिल भाषाकन्नड़ भाषा
डोगरी भाषानेपाली भाषा
गुजराती भाषाबोड़ो भाषा
कश्मीरी भाषापंजाबी भाषा
उर्दू भाषामराठी भाषा
ओड़िआ भाषाबंगाली भाषा
मणिपुरी भाषामैथिली भाषा
संस्कृत भाषासंथाली भाषा
सिन्धी भाषा तेलुगू भाषा

तो अब आप जान गए होंगे कि Bharat Ki Rashtrabhasha Kya Hai? भारत एक ऐसा देश है जो अपनी विभिन्नताओं के लिए जाना जाता है, यहां हर राज्य की अपनी राजनैतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान है लेकिन उसके बाद भी देश में की कोई एक राष्ट्रभाषा नहीं है।

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