ऑक्सीजन की खोज किसने की थी और कब?

आज हम इस आर्टिकल में जानेंगे कि Oxygen Ki Khoj Kisne Ki ऑक्सीजन गैस इस पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों के जीवित रहने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ऑक्सीजन गैस के बिना धरती पर जीवन असंभव है। ऑक्सीजन एक रासायनिक तत्व है जोकि एक रंगहीन, स्वादहीन एवं गंधरहीन एवं दो परमाणुओं द्वारा मिलकर बनी गैस है। ऑक्सीजन को हिंदी में ‘प्राण-वायु या जारक’ भी कहते हैं। ऑक्सीजन का रासायनिक सूत्र O2 है जोकि प्रथ्वी पर सबसे ज्यादा पाया जाने वाला तीसरा तत्व है। ऑक्सीजन (Oxygen) प्रथ्वी के अनैक पदार्थों (वायुमंडल, पानी, जीव-जन्तु, खनिज, वनस्पति, चट्टान आदि) में पायी जाती है।

इसके विभिन्न रासायनिक गुणों के पता चल जाने से आज इसका उपयोग स्टील, प्लास्टिक, वस्त्र आदि उद्योगों में बड़े स्तर पर किया जा रहा हैं। ऑक्सीजन का घनत्व 1.4290 ग्राम/लीटर होता है और वहीं प्रथ्वी पर मौजूद सभी पेड-पौधे कार्बन डाईऑक्साइड गैस (Co2) ग्रहण करते हैं और ऑक्सीजन गैस प्रदान करते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं। आइए जानते हैं कि Oxygen Ki Khoj Kisne Ki?

ऑक्सीजन की खोज किसने की थी

ऑक्सीजन की खोज मुख्यत तीन वैज्ञानिकों ने की थी। जिनका नाम कार्ल विल्हेम शीले (Carl Wilhelm Scheele), जोसेफ प्रिस्टले (Joseph Priestley) और एन्टोनी लैवोइजियर (Antoine Lavoisier) था। ऑक्सीजन की खोज सबसे पहले वर्ष 1772 में स्वीडन के वैज्ञानिक कार्ल विल्हेम शीले ने की थी। शीले ने कई यौगिकों को गर्म करके परिक्षण किया; जिसमे पोटेशियम नाइट्रेट, मैंग्नीज ऑक्साइड, मरकरी ऑक्साइड और अन्य सामिग्री गैसों को गर्म करके ऑक्सीजन गैस को प्राप्त किया। इस परिक्षण के बाद इन्होने देखा कि इस गैस में वस्तुएं तेजी से जल रही हैं इससे इन्हें पता चला कि यह गैस वस्तुओं के जलने में सहायक होती है। इन्होने इस गैस का नाम अग्रि वायु (फायर एयर) रख दिया। वर्ष 1977 में शीले की खोज को सार्वजनिक रूप से प्रकाशित कर दिया गया।

आपको बता दे जोसेफ प्रिस्टले को गैसों के अध्ययन में रुचि थी। इनकी हवा में मौजूद गैसों का अध्ययन करने में काफी दिलचस्पी थी, इसी कारण इन्होने देखा की हवा का कुछ भाग ही जलने में सहायक है। जिसके बाद इन्होने वर्ष 1774 में ‘मरकरी ऑक्साइड’ को एक छोटे से पात्र में लेकर एक बंद बर्तन में गर्म किया और बाद में जो वायु निकली उसे एकत्रित कर लिया। इसके बाद जब इन्होने कोई जलती हुई चीज इस वायु में रखी तो वह और भी तेजी से जलने लगी और इन्होने इसे सूंगा तो अन्य गैसों के मुकाबले यह  गैस शरीर के लिए बहुत अच्छी थी।

फ्रांसीसी वैज्ञानिक एन्टोनी लैवोइजियर की ऑक्सीजन की खोज में मुख्य भूमिका रही हैं क्योंकि इनसे पहले दोनों वैज्ञानिकों (शीले और प्रिस्टले) ने अपनी खोजों में पदार्थ बना चुके थे। लेकिन वह दोनों इसे एक नया तत्व नहीं बल्कि ‘फ्लॉजिस्टन-रहित वायु’ मानकर चल रहे थे जो कहीं न कहीं आगे चलकर ऑक्सीजन कही जाने वाली थी। इसके बाद एन्टोनी लैवोइजियर ने शीले और प्रिस्टले द्वारा की गई खोजों से जुडी सारी जानकारी अच्छे से इकट्ठी की और उन प्रयोगों को दुबारा से करके देखा। एन्टोनी लैवोइजियर ने पाया कि यह हवा (ऑक्सीजन) मुक्त अवस्था में पायी जाती है। न कि किसी विशिष्ट घटक के दहन से उत्पन्न होती है। जिसे अंत में इन्होने ऑक्सीजन गैस का नाम दे दिया। इसके बाद वर्ष 1775 में इन्होने इस खोज को सामान्य रूप से प्रकाशित कर दिया।

प्राकृतिक और कृत्रिम ऑक्सीजन कैसे बनती है

वर्तमान समय में हम ऑक्सीजन दो प्रकार से प्राप्त करते हैं। जिसमे पहला तो हम प्रथ्वी के वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन जोकि पेड-पौधों प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया करने से प्राप्त करते हैं। इसके अलावा ऑक्सीजन के उपयोगों को देखते हुए हम कृत्रिम ऑक्सीजन गैस का बड़े-बड़े प्लांटों और फेक्ट्रीयों में बहुत बड़े पैमाने पर उत्पादन करते हैं। प्रथ्वी के वातावरण में मौजूद हवा मे 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन तथा 1% अन्य गैसों (आर्गन, कार्बन डाईऑक्साइड, नियोन, जीनोन, जल-वाष्प आदि) का मिश्रण मौजूद है। वहीं कृत्रिम ऑक्सीजन गैस प्राप्त करने के लिए हम इन सभी गैसों के मिश्रण में से केवल ऑक्सीजन गैस को कई प्रक्रिया द्वारा एयर सेप्रेसन तकनीक से प्रथक (अलग) कर लेते हैं। इस तकनीक में हम हवा को बहुत अधिक ठंडा करके ऑक्सीजन को अलग करते हैं।

इस प्रक्रिया में सबसे पहले मिश्रित हवा को स्क्रू कम्प्रेसर की मदद से कॉम्प्रेस करके एक टैंक में भर लिया जाता है। जिसके बाद इसे कई फ़िल्टर से गुजारा जाता है, जिससे कि हवा में मौजूद ठोस कणों, धुल एवं जल-वाष्प आदि को अलग हो जाते हैं। इसके बाद केवल मिश्रित हवा बचती है। नाइट्रोजन को तेजी से 195.8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ठंडा करते हैं तो वह लिक्विड फॉर्म में आ जाती है। इसी प्रकार ऑक्सीजन को तेजी से 183.0 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ठंडा करने पर यह भी लिक्विड का रूप ले लेती है। इसी प्रकार आर्गन 185 डिग्री सेल्सियस तापमान पर लिक्विड फॉर्म, जीनोन 108 डिग्री सेल्सियस तापमान पर लिक्विड आदि गैसों का मिश्रण लिक्विड फॉर्म में बदल जाने के बाद सेपरेशन प्रक्रिया द्वारा सभी गैसों को अलग-अलग एकत्रित कर लिया जाता है। 99.5% शुद्ध कृत्रिम ऑक्सीजन गैस लिक्विड फॉर्म में नीले और पीले रंग की दिखाई देती है।

ऑक्सीजन के भौतिक गुण

  • ऑक्सीजन का क्वथनांक 183 °C होता है और ठोस ऑक्सीजन का हिमांक 218.4 °C होता है। 15 डिग्री सेल्सियस पर संलग्न और वाष्पीकरण ताप क्रमशः 3.30 और 50.9 कैलोरी प्रति ग्राम है।
  • ऑक्सीजन पानी में थोड़ा घुलनशील है, जो जलीय जंतुओं के श्वसन के लिए उपयोगी है।
  • ऑक्सीजन का विशिष्ट तापमान 15°C होता है और स्थिर आयतन पर विशिष्ट तापमान से इसका अनुपात 1.401 होता है।
  • ऑक्सीजन को ठंडा करने पर ऑक्सीजन नीले रंग के तरल में परिवर्तित हो जाती है।
  • ऑक्सीजन गैस अपने आप नहीं जलती, बल्कि किसी चीज को जलाने में मदद करती है।

ऑक्सीजन के रासायनिक गुण

  • हवा से ऑक्सीजन अलग करने के लिए अब द्रव हवा का अत्यधिक उपयोग होता है, जिसके प्रभाजित आसवन से ऑक्सीजन प्राप्त किया जाता है।
  • ऑक्सीजन प्राप्त करने के विचार से कुछ अन्य ऑक्साइड भी जैसे ताँबा, पारा आदि के ऑक्साइड  इसी प्रकार उपयोगी हैं।
  • बहुत से तत्व ऑक्सीजन से सीधा संयोग करते हैं। इनमें कुछ जैसे फॉस्फोरस, सोडियम इत्यादि तो साधारण ताप पर ही धीरे-धीरे क्रिया करते हैं, परंतु अधिकतर, जैसे कार्बन, गंधक, लोहा, मैग्नीशियम इत्यादि, गरम करने पर ऑक्सीजन से भरे बर्तन में ये वस्तुएँ दहकती हुई अवस्था में डालते ही जल उठती हैं और जलने से ऑक्साइड बनता है। ऑक्सीजन में हाइड्रोजन गैस जलती है तथा पानी बनता है। यह क्रिया इन दोनों के गैसीय मिश्रण में विद्युत चिनगारी से अथवा उत्प्रेरक की उपस्थिति में भी होती है।
  • जब बेरियम ऑक्साइड को गर्म  किया जाता है लगभग 500° सेंटीग्रेड तक तब वह हवा से ऑक्सीजन लेकर परॉक्साइड बनाता है। अधिक तापक्रम लगभग 800° सेंटीग्रेड पर इसके विघटन से ऑक्सीजन प्राप्त होता है तथा पुन: उपयोग के लिए बेरियम ऑक्साइड बचा रहता है। औद्योगिक उत्पादन के लिए ब्रिन विधि इसी क्रिया पर आधारित थी।

ऑक्सीजन के उपयोग

  • ऑक्सीजन का उपयोग जीवित प्राणियों का साँस लेने के रूप में किया जाता है।
  • मेडिसिन में ऑक्सीजन का उपयोग किया जाता है मतलब मेडिकल इमरजेंसी मे मरीज को ऑक्सीजन दी जाती है।
  • ऑक्सीजन स्वयं कभी नहीं जलती है, लेकिन किसी भी चीज को जलाने के लिए अति आवश्यक होती है।
  • ऑक्सीजन दो धातुओं को जोड़ने (बैंडिंग करने में) में और क्लोरीन, सल्फूरिक अम्ल आदि के औधोगिक निर्माण (स्टील इंडस्ट्रीज आदि में) में प्रयोग की जाती है।
  • ऑक्सीजन का प्रयोग समुन्द्र में डाइविंग करने के लिए, ग्लेसियरों या ऊँचे पहाड़ों पर पर्वतारोही के लिए तथा अंतरिक्ष में जाने के लिए अंतरिक्ष-यात्री द्वारा किया जाता है।

तो अब आप जान गए होंगे कि Oxygen Ki Khoj Kisne Ki ऑक्सीजन की खोज मुख्यत तीन वैज्ञानिकों ने की थी। जिनका नाम कार्ल विल्हेम शीले (Carl Wilhelm Scheele), जोसेफ प्रिस्टले (Joseph Priestley) और एन्टोनी लैवोइजियर (Antoine Lavoisier) था।

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My name is Anaya Sharma. I am studying engineer. I write on the Health and Food Recipes Topic.